नई दिल्ली, 31 मई। आज दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और सांसद श्री रमेश बिधूड़ी ने प्रेस वार्ता कर केजरीवाल सरकार पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए सांसद रमेश बिधूरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आगाह करने के बावजूद भी केजरीवाल सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया और स्थिति बिगड़ती चली गई। बिधूड़ी ने माननीय प्रधानमंत्री जी का 17 मार्च का मुख्यमंत्रियों को सम्बोधन का वीडियो भी चलवा कर लोगों को सच्चाई से रूबरू करवाया। दूसरी तरफ 13 अपै्रल को केजरीवाल द्वारा दिया गया स्टेटमेंट वीडियो भी चलवाया जिसमें केजरीवाल कहते हैं कि दिल्ली में बेडों की कमी नहीं है, वेंटिलेटर्स की कमी नहीं हैं और ऑक्सीजन की कमी नहीं हैं। जिसके बाद 17 अपै्रल को चार दिन बाद उनकी नाकामियों और लापरवाही का वीडियो भी चलवाया जिसमें केजरीवाल कहते हैं कि दिल्ली में आईसीयू बैड की कमी है, ऑक्सीजन की भी काफी कमी है। दिल्ली में कोरोना बीमारी को लेकर केजरीवाल कितने लापरवाह रहे ये स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। केजरीवाल सरकार का कोरोना को लेकर लापरवाही का नतीजा ये रहा कि दिल्ली में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 हजार मौत हुई है जबकि हकीकत यह है कि 35 से 36 हजार लोगों ने कोरोना से अपनी जान गवाई है। 30 मई को सरकारी आंकड़ा बताता है कि 23 मार्च तक डेथ रेट 2.54ः थी जो कि बाकी राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा केजरीवाल के ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए क्योंकि उन्हीं की लापरवाही के कारण इतने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी अपनी सोच विभाग को वर्ल्ड क्लास बताने वाले केजरीवाल साल 2015 के मेनिफेस्टो में यह कहा था कि प्रत्येक 1000 व्यक्ति के बीच में 5 बेड की व्यवस्था की जाएगी लेकिन वह वादा सिर्फ जुमला साबित हुआ। यही नहीं साल 2019 में दिल्ली सरकार के इकोनामिक सर्वे ने एक आंकड़ा दिया जिसमें यह कहा गया कि साल 2014 में दिल्ली में कुल अस्पताल 95 थे लेकिन साल 2019 आते-आते इनकी संख्या 88 हो गई। जबकि दिल्ली में प्रत्येक साल 5 लाख की जनसंख्या बढ़ती है चाहे वह नवजात शिशु हो या फिर प्रवासी मजदूर जो दूसरे राज्यों से नौकरी और रोजगार की तलाश में दिल्ली आते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार की लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत साल 2013-14 में शुरू की गई अस्पतालों का अभी तक निर्माणाधीन होना है। अम्बेडकर नगर में 600 बेड का अस्पताल जो साल 2013-14 में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था उस वक्त निर्माण कार्य शुरू किया गया जो आज भी निर्माणाधीन हैं। इंदिरा गांधी अस्पताल द्वारका में जिसमें लगभग 1725 बेड हैं साल 2014 से ही निर्माणाधीन हैं। इतनी बड़ी आपदा आने के बाद भी इसमें सिर्फ 100 बेड शुरू करने का आदेश दिया गया। बुराड़ी स्थित 768 बेडो का अस्पताल को अभी तक शुरू नहीं किया गया है। श्री बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि साल 2013-14 में दिल्ली की बजट 39000 करोड़ होने पर 12.11ः स्वास्थ्य पर खर्च होता था, लेकिन 2021-22 में दिल्लीक की कुल बजट बढ़कर 69000 करोड़ जरूर हो गया मगर हेल्थ पर मात्र 11.64ः पैसे खर्च करने की बात सरकार द्वारा कही गई। आखिर इतना बड़ा धोखा दिल्ली की जनता के साथ क्यों किया गया? बाकी पैसे कहां खर्च किए जा रहे हैं इसका जवाब केजरीवाल सरकार को जरूर देना चाहिए। प्रचार और विज्ञापन की दुनिया से अभी तक केजरीवाल सरकार नहीं उबर पाई है।

दिल्ली भाजापा ने केजरीवाल सरकार से पूछे सवालः-
– केजरीवाल सरकार ने जो कोरोना वॉरियर्स जिनकी मौत हो गई थी को एक करोड रुपए देने का एलान किया था उनको कब तक एक करोड़ रुपया दिया जाएगा?

– 44,262 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य व्यव्स्था लचर क्यों?
– प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मिली चेतावनी के बावजूद स्वास्थ्य व्यव्स्था ठीक क्यों नहीं की गई और तीसरी कोरोना लहर को रोकने के क्या इंतजाम किए गए हैं?
– केजरीवाल सरकार के अनुसार 24 हजार मौत हुई है जबकि हकीकत यह है कि 35 से 36 हजार लोगों ने कोरोना से अपनी जान गवाई है। –
केजरीवाल द्वारा साल 2015 में कहा गया कि प्रत्येक 1000 व्यक्ति के लिए 5 बेड की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन यह वादा आज भी जुमला है, क्यों?
– साल 2013-14 में जब दिल्ली का बजट 39000 करोड़ रुपए था तो 12.11ः स्वास्थ्य पर खर्च होता था, लेकिन 2021-22 बजट बढ़कर 69000 करोड़ रुपए हो गया तो स्वास्थ्य पर 11.64ः खर्च किया। दिल्ली की जनता के साथ ऐसा धोखा क्यों?
– अरविंद केजरीवाल ने घोषणा कर कहा था कि कोरोना योद्धाओं की मृत्यु होने पर उनके परिवार को एक-एक करोड़ रूपये मुआवजा राशि दी जायेगी। केजरीवाल अपनी घोषणा के मुताबिक सभी मृतकों के परिवारों को मुआवजा राशि कब देंगे यह बताएं?