2015

8.Jul.2015 || राजधानी दिल्ली में गॉंवों का लाल डोरा बढ़ाया जाए।

By July 8, 2015 October 28th, 2021 No Comments

आज दिनांक 07 अगस्त, 2015 को दक्षिणी दिल्ली से सांसद श्री रमेश बिधूड़ी जी ने लोक सभा में ‘शून्य काल’ के दौरान सदन का ध्यान राजधानी दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की अनुपलब्धता के कारण बढ़ रही समस्याओं की तरफ केंद्रित किया। इस सन्दर्भ में उन्होनें कहा कि दिल्ली राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सन् 1908-09 में अंग्रेजो के शासन काल के दौरान जमीन की बंदोबस्ती की गई जिसके अनुसार गॉंवों की सीमा निर्धारित थी, जिसे ‘लाल डोरे’ का नाम दिया गया, तथा लाल डोरे की परिधि में आने वाले लोगों को मालिकाना हक भी दिया गया, जिसके अनुसार उस क्षेत्र में भूसा डालने के कोठे बनाने व पशुपालन हेतु छप्पर डालने आदि की छूट दी गई, इसके अतिरिक्त आवश्यकतानुसार एक-दो मंजिल मकान बनाने, व्यवसाय, धंधे आदि की भी छूट दी गई थी तथा इन सब पर हाउस टैक्स व प्रोपर्टी टैक्स नही लगाया गया। इसके पश्चात सन् 1952-53 में चकबंदी के द्वारा लाल डोरे को ग्रामीण क्षेत्रों की बढ़ती हुई आबादी को देखते हुए बढ़ाया गया। सन् 1963 में बिल्ड़िंग बाई-लॉज के अनुसार लालडोरा/एक्टैन्ड़ लाल डोरे के प्लॉटों के अन्दर की कुछ छूट दी गई।

परन्तु आज यह चिंता का विषय है कि जिस तरह से दिल्ली की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, उसके अनुसार दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को विस्तार हेतु पर्याप्त जमीन नही मिल पा रही है, परिवार बढ़ रहे हैं और जमीन की अनुपलब्धता ग्रामीणों में भारी असंतोष का कारण बन रही है।

इस समस्या के समाधान हेतु भारत सरकार द्वारा तेजेन्द्र खन्ना समिति का गठन किया गया था, जिसने 13 मई, 2006 को अपनी रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों की बढ़ती हुई आबादी और लाल डोरे की व्यवस्था के कारण जमीन की अनुपलब्धता को स्वींकार किया तथा जन सुरक्षा एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए लाल डोरे/एक्सटेंडेड लाल डोरे में भविष्य के निर्माण के लिए उचित नियमन हेतु वहॉं किए गए विभिन्न निर्माणों को ध्यान में रखते हुए कई सुझाव दिए।

श्री बिधूड़ी जी ने कहा कि वर्ष 2007 में पूर्व में रही सरकार द्वारा भी इस समस्या के निदान हेतु कुछ कदम उठाए जाने की खबरे थीं, जिसके अनुसार लाल डोरा बढ़ाने हेतु पहला रास्ता चकबंदी करना अथवा भूमि सुधार अधिनियम की धारा-23;3द्ध के द्वारा माननीय उपराज्यपाल की अनुमति लेना है, परन्तु अत्यंत खेद का विषय यह है की इस संबंध में ना ही तेजेन्द्र खन्ना रिपोर्ट के सुझावों पर किसी तरह की कार्यवाही हुई और ना ही पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा भूमि सुधार अधिनियम के तहत कोई उचित कदम उठाया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि आज इस समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है, पर्याप्त भूमि ना होने के कारण दिल्ली में ग्रामीण जन-जीवन अस्त-व्यस्त होता जा रहा है। राजधानी दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों की जनता आज भी किसी उचित कार्यवाही के आभाव में कई मुश्किलों का सामना कर रही है तथा किसानों द्वारा कई बार धरने-प्रदर्शन भी किये जा चुके हैं।

श्री बिधूड़ी जी ने सदन के माध्यम से लोक सभा अध्यक्ष व सरकार से अनुरोध किया कि दिल्ली की बढ़ती हुई ग्रामीण आबादी की इन गम्भीर वास्तविक समस्याओं व समय की मॉंग को देखते हुए लाल डोरे की परिधि के विस्तार हेतु जल्द कदम उठाए जाएॅं।